बड़ी कामयाबीः एक ब्लड टेस्ट से पता लगेगा आठ प्रकार के कैंसर का

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कैंसर का पता लगाने के लिए आसान तरीका खोजने में जुटे वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी मिली है। जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी की एक टीम ने एक ऐसी विधि ईजात की है जिससे इस घातक बीमारी के बारे आठ प्रकारों के बारे में पता लगाया जा सकता है।

शोधकर्ताओं की टीम के एक सदस्य ने कहा कि ब्लड टेस्ट की इस अनोखी विधि को खोजने वाले वैज्ञानिकों का उद्देश्य कैंसर का समय से पहले पता लगाना और लोगों की जान बचाना है। इस बीमारी के बारे में ब्लड टेस्ट की मदद से भी जानकारी हासिल की जा सकती है। शरीर में मौजूद या बनी ग्रंथि की वजह से डीएन की प्रोटीन में कुछ विशेष बदलाव देखने को मिलते हैं। यह बदलाव ब्लड में भी देखे जा सकते हैं।

कैंसर का पता लगाने वाले इस टेस्ट में 16 तत्वों को देखा जा सकता है जो कि कैंसर होने की स्थिति में लगातार बढ़ते हैं। कई बार इस मामले में देखने को मिलता है आठ प्रकार की प्रोटीन का भी रिसाव होता है।

1005 मरीजों में हुआ शोध
कैंसर टेस्ट की नई विधि का पता लगाने वाली टीम ने अंडाशयए लीवरए ब्रेस्टए फेफड़े और आमाशय आदि के कैंसर से पीडि़त 1005 मरीजों का पर यह टेस्ट किया। टेस्ट में पता लगा कि इस घातक बीमारी के टिश्यू लगातार उनमें बढ़ रहे थे।

जिन मरीजों पर यह टेस्ट किया गया उनमें से 70 फीसदी लोगों में सफलता पूर्वक कैंसर की पहचान की जा सकी। यह पहचान कैंसर के उन मरीजों में की जा सकी जिन्होंने अभी तक इसका इलाज शुरू नहीं कराया था।

इस प्रमुख शोधकर्ता डॉ क्रिश्चियन टोमासेट्टी ने मीडिया को बताया कि इस बीमारी के बारे में पहले से पता लगाना पहुत मुश्किल काम हैए लेकिन टेस्ट में जो रिजल्ट मिले हैं वह उत्साह जनक हैं। इससे फायदा यह होगा कि लोग बीमारी बढ़ने से पहले ही अपना इलाज शुरू करा सकेंगे।

क्या यह एक यूनिवर्सल टेस्ट?
कैंसर का पता लगाने वाले इस टेस्ट के बारे में एक साइंस मैगजीन में व्यापक जानकारी प्रकाशित की गई है। इस टेस्ट को काफी अच्छा माना गया है क्योंकि इसमें डीएनए और प्रोटीन्स के बदलाव के बारे में जानकारी मिलती है।

शोध टीम के लीडर और सेंटर फॉर इवोलुशन एंड कैंसर एट द कैंसर रिसर्च के डॉक्टर गर्ट अटार्ड ने मीडिया से कहा कि इस टेस्ट विधि में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि वह इस विधि से उस ब्लड टेस्ट के काफी करीब पहुंच चुके हैं जिससे कैंसर का पता लगाया जा सकता है। अब उन्हें इसकी तकनीक मिल चुकी है।

इस तकनीक से मात्र 500 डॉलर यानी 31870 रुपए से भी कम में लोग अपना टेस्ट करा सकेंगे।

एजेंसी

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