वुडपेकर की तकनीक से हो सकता है दिमागी चोट का इलाज

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वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन के आधार पर कहा है कि अपनी चोंच से पेड़ में छेद करनो वालो पक्षी कठफोड़वा को इस काम में चोट आती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब कठफोड़वा जोर.जोर से पेड़ के तन में चोंच मारती है तो उससे उसके दिमाग में झटका लगता है। इस पक्षी के दिमाग में लगने वाला ये झटका इंसानों के मुकाबले कई गुना तेज होता है।

बॉस्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने वुडपेकर ;कठफोड़वाद्ध पर किए इस शोध में कहा है कि लगातार पेड़ के तने में चोंच मारना इस पक्षी की फितरत तो हैए लेकिन इससे इसके दिमाग पर गहरी चोट लगती है। उन्होंने इस अध्ययन में पाया कि यह चोट इंसानों को लगने वाली चोट से 14 गुना ज्यादा तेजी से लगती है। हालांकि शोधकर्ताओं का ये भी कहना है कि इस गंभीर चोट के बावजूद कठफोड़वा का दिमाग एकदम सही ढंग से काम करता है।

इंसानी रोग को समझने में मिलेगी मदद
शोधकर्ताओं ने वुडपेकर के ब्रेन पर किए इस रिसर्च में बताया कि उनके दिमाग में श्टॉश् नाम का प्रोटीन काफी मात्रा में बनता है। यही प्रोटीन इंसानों में कई तरह की

दिमागी बीमारी का कारण होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस रिसर्च से इंसानों को होने वाले दिमागी रोग के इलाज के लिए मदद मिल सकती है।

अध्ययन से जुड़े एक वैज्ञानिक ने कहा कि आजतक हम दिमाग गंभीर चोट से बचाने के लिए अलग.अलग किस्म के गार्ड और हेल्मेट बनाते आ रहे हैं। लेकिन आजतक किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की थी कि कठफोड़वा अपने मस्तिष्क को गंभीर झटकों से कैसे बचाता है। उन्होंने कहा कि दिमाग में बनने वाले टॉ प्रोटीन को ही नसों के बचाव के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है जैसा कि ये पक्षी करता है।

एजेंसी

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