डिमेंशियाः सर में चोट से हो सकता है डिमेंशिया

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एक ताजा अध्ययन में सामने आया है कि मेमोरी लॉस यानि याददाश्त कमजोर पड़ने से जुड़ी गंभीर बीमारी डिमेंशिया होने की बड़ी वजहए सालों पहले सर में लगी चोट हो सकती है। विज्ञानिकों ने एक विस्तृत रिसर्च के आधार पर कहा है कि अगर आपको कभी सर में गंभीर चोट लगी हो तो उसका असर 30 साल बाद डिमेंशिया बीमारी के रूप में देखा जा सकता है। साथ ही चोट जितनी गंभीर होगी उतना ही मुश्किल होगा डिमेंशिया का इलाज।

सर की चोट से 6 गुना ज्यादा खतरा
स्वीडन की ऊमिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रिसर्च के आधार पर कहा है आम लोगों के मुकाबलेए डिमेंशिया बीमारी छह गुना ज्यादा उन लोगों को होती है जिन्हें कभी सर में गहरी चोट आई हो। ये नतीजे करीब एक लाख लोगों पर की गई रिसर्च के बाद सामने आए हैं। इस अध्ययन में ये भी कहा गया है कि जितनी गहरी सर की चोट होगी उतना ही मुश्किल होगा डिमेंशिया बीमारी का इलाज। इसी को देखते हुए कई संस्थानों ने फुटबॉलए रग्बीए मुक्केबाजी जैसे खिलाड़ियों को लगने वाली गंभीर चोटों को लेकर चिंता जताई है।

इस तरह की गई रिसर्च
शोधकर्ताओं ने स्वीडन में रहने वाले कुल 10 लाख व्यस्क लोगों को इस शोध में शामिल किया। ये रिसर्च 1964 से लेकर 2012 तक की गई जिसके सभी नतीजे मिलाकर पेश किए गए। इसमें से करीब डेढ़ लाख वो लोग थे जिन्हें सड़क दुर्घना के कारण सर में गहरी चोट आई थी। रिसर्च में ये भी सामने आया कि जिन लोगों को हल्की सर की चोटें आई थीं उन्में भी डिमेंशिया होने का खतरा दोगुना देखा गया। इसके अलावाए करीब दो लाख मिलिट्री वालों ने बताया कि बम फटने से उन्हें आई चोट के कारणए उन्हें याददाश्त की बीमारी हो गई।

अमेरिकन फुटबॉल खेलने वाले खिलाड़ियों को खतरा
इस रिसर्च में कहा गया है कि अमेरिकन फुटबॉल खेलने वाले पूर्व खिलाड़ियों को भी दिमाग से जुड़ी दिक्कतें हुईंए क्योंकि जब वो खेलते थे तब उनकी सर में चोटे आई थीं। इसके साथ ही ये गेम खेलने वाले 99 प्रतिशत खिलाड़ियों को आगे चलकर डिमेंशिया जैसी दिमागी दिक्कतें आती हैं।

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