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इलेक्ट्रिक कार में बैठते ही क्यों बिगड़ने लगती है तबीयत?

प्रकाशित: October 8, 2026, 11:33 AM | हेल्थ टिप्स
इलेक्ट्रिक कार में बैठते ही क्यों बिगड़ने लगती है तबीयत?


इलेक्ट्रिक वाहनों यानी EVs का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ये वाहन कम शोर, बेहतर ऊर्जा दक्षता और कम चलने वाले खर्च के कारण लोगों को पसंद आ रहे हैं। लेकिन कुछ यात्रियों के लिए इलेक्ट्रिक कार में सफर करना परेशानी का कारण भी बन रहा है।

कुछ लोगों का कहना है कि इलेक्ट्रिक कार में बैठते ही उन्हें मितली, चक्कर, पसीना, बेचैनी और उल्टी जैसी समस्या होने लगती है। खास बात यह है कि इनमें से कई लोगों को पेट्रोल या डीजल वाली कार में ऐसी परेशानी नहीं होती थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं और इसे समझने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।

मोशन सिकनेस क्या होती है?

मोशन सिकनेस यानी सफर के दौरान होने वाली परेशानी तब महसूस होती है जब हमारे शरीर की अलग-अलग इंद्रियों से मिलने वाले संकेत आपस में मेल नहीं खाते।

हमारे शरीर में गति को समझने के लिए मुख्य रूप से तीन सिस्टम काम करते हैं—

  • आंखें, जो आसपास की चीजों की गति देखती हैं।
  • अंदरूनी कान का बैलेंस सिस्टम, जो शरीर की गति और संतुलन को महसूस करता है।
  • शरीर के सेंसर, जो शरीर की स्थिति और हरकत के बारे में दिमाग को जानकारी देते हैं।

जब इन तीनों से मिलने वाले संकेतों में अंतर होता है तो दिमाग भ्रमित हो सकता है। इसी वजह से मितली, चक्कर और उल्टी जैसी समस्या पैदा हो सकती है।

इलेक्ट्रिक कार में यह समस्या क्यों बढ़ सकती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की कुछ विशेषताएं कुछ यात्रियों में मोशन सिकनेस को बढ़ा सकती हैं।

1. इंजन की आवाज और कंपन कम होना

पेट्रोल और डीजल कारों में इंजन की आवाज और कंपन से यात्रियों को वाहन की गति में बदलाव का अंदाजा मिलता रहता है।

इसके मुकाबले इलेक्ट्रिक कारें काफी शांत होती हैं। तेज गति पकड़ने या धीमा होने के दौरान आवाज और कंपन का संकेत कम मिलने की वजह से आंखों और शरीर को मिलने वाले संकेतों में अंतर पैदा हो सकता है।

2. रीजेनरेटिव ब्रेकिंग

EVs में रीजनरेटिव ब्रेकिंग एक महत्वपूर्ण फीचर है। जब ड्राइवर एक्सेलरेटर से पैर हटाता है तो इलेक्ट्रिक मोटर ऊर्जा पैदा करते हुए वाहन की गति कम करने में मदद करती है।

कुछ कारों में यह प्रक्रिया काफी तेज महसूस हो सकती है। ऐसे में यात्रियों को बार-बार हल्का आगे-पीछे झटका महसूस हो सकता है।

यही बदलाव कुछ संवेदनशील यात्रियों में मितली या बेचैनी को बढ़ा सकते हैं।

3. तेज एक्सेलरेशन और डीसेलरेशन

इलेक्ट्रिक मोटर तुरंत टॉर्क उपलब्ध करा सकती है। इसलिए कई EVs बहुत तेजी से गति पकड़ सकती हैं।

यदि ड्राइवर बार-बार तेजी से एक्सेलरेट और ब्रेक करता है तो यात्री के शरीर को लगातार गति में बदलाव महसूस हो सकता है। इससे मोशन सिकनेस की समस्या बढ़ सकती है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर इलेक्ट्रिक कार में बैठने वाले व्यक्ति को यह समस्या होगी।

क्या हर व्यक्ति को EV में मोशन सिकनेस होती है?

नहीं।

कई इलेक्ट्रिक कार मालिकों और यात्रियों को ऐसी कोई परेशानी नहीं होती। कुछ लोगों का अनुभव तो इसके बिल्कुल उलट है और वे पेट्रोल-डीजल कारों की तुलना में EV में कम मोशन सिकनेस महसूस करते हैं।

यानी इलेक्ट्रिक कार और मोशन सिकनेस के बीच संबंध अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार इस विषय पर बड़े और विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययनों की आवश्यकता है।

बच्चों और महिलाओं में ज्यादा हो सकती है समस्या

मोशन सिकनेस किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन कुछ लोग इसके प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों और महिलाओं में मोशन सिकनेस की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। बच्चों में यह समस्या खास तौर पर एक निश्चित उम्र में अधिक देखने को मिलती है और उम्र बढ़ने के साथ शरीर धीरे-धीरे इसकी आदत डाल सकता है।

जेनेटिक कारण भी किसी व्यक्ति की मोशन सिकनेस की संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकते हैं।

इलेक्ट्रिक कार में मोशन सिकनेस से कैसे बचें?

अगर आपको EV में सफर करते समय मितली या चक्कर की समस्या होती है तो कुछ आसान उपाय मददगार हो सकते हैं।

सफर के दौरान अपनाएं ये उपाय

  1. मोबाइल फोन देखने या किताब पढ़ने से बचें।
  2. जितना संभव हो सामने की ओर बाहर देखें।
  3. पीछे की सीट की जगह फ्रंट पैसेंजर सीट पर बैठें।
  4. पीछे बैठना हो तो संभव हो तो बीच वाली सीट चुनें, जहां से सामने का रास्ता दिखाई दे।
  5. सिर को हेडरेस्ट से टिकाकर स्थिर रखने की कोशिश करें।
  6. सीट को थोड़ा पीछे झुकाकर आरामदायक स्थिति में बैठें।
  7. सांस को सामान्य और नियंत्रित रखें।
  8. संभव हो तो खिड़की खोलकर ताजी हवा लें।
  9. लंबी यात्रा से पहले पर्याप्त पानी पिएं और पूरी नींद लें।
  10. यात्रा से पहले बहुत अधिक तला-भुना या भारी भोजन करने से बचें।

जरूरत पड़ने पर दवा भी ली जा सकती है

अगर मोशन सिकनेस बार-बार और ज्यादा गंभीर रूप से होती है तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेकर ट्रैवल सिकनेस की दवा ली जा सकती है।

हालांकि, ऐसी कुछ दवाओं से नींद या सुस्ती आ सकती है। इसलिए बिना सलाह के दवा लेना उचित नहीं है, खासकर अगर व्यक्ति को यात्रा के दौरान खुद वाहन चलाना हो।

क्या शरीर को इलेक्ट्रिक कार की आदत पड़ सकती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि कई मामलों में शरीर समय के साथ वाहन की गति और उसके ड्राइविंग पैटर्न के अनुकूल हो सकता है।

यदि व्यक्ति नियमित रूप से इलेक्ट्रिक वाहन में यात्रा करता है तो उसका दिमाग और शरीर गति से मिलने वाले नए संकेतों के साथ तालमेल बैठाना सीख सकता है। इससे समय के साथ मोशन सिकनेस की समस्या कम हो सकती है।

निष्कर्ष

इलेक्ट्रिक कार में बैठने के बाद मितली या चक्कर आने का अनुभव वास्तविक हो सकता है, लेकिन हर व्यक्ति में इसका कारण एक जैसा नहीं होता। EV की कम आवाज, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, तेज एक्सेलरेशन और ड्राइविंग स्टाइल जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभा सकते हैं।

फिलहाल इलेक्ट्रिक वाहनों को सीधे तौर पर मोशन सिकनेस का निश्चित कारण मानने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। अगर आपको बार-बार या बहुत ज्यादा परेशानी होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।