क्यों होती है मर्दाना ताकत में कमी, क्या है इसका रामबाण आयुर्वेदिक इलाज
नई दिल्ली (Ayurvedic treatment for impotence): पैंतीस वर्ष की आयु के बाद मर्दाना कमजोरी होना कोई बीमारी नहीं। ये कई बातों का संकेत है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे - तनाव, अधूरी नींद, दिन भर बैठे-बैठे काम करना और गलत खान-पान। ये चीजें तीन समस्याएं पैदा करती हैं - स्ट्रेस हार्मोन कार्टिसोल को बढ़ाना, मर्दाना ताकत के हॉर्मोन टैस्टोटीरोन को कम करना, लोअर बॉडी में ब्लड फ्लो को कम करना।
आयुर्वेद में इसे कहते हैं ओजस कम होना। ओजस यानी आपके शरीर का वो अंदरूनी रिजर्व जो आपकी ताकत, एनर्जी और वाइटैलिटी को संभालता है। जब ओजस कम हो जाता है, तो शरीर में इन तीनों चीजों की कमी होने लगती है। तो अब सवाल यह है कि इस कमी को दूर कैसे करें। इसके लिए कोई जादू की गोली उपलब्ध नहीं है। इसके लिए हमें तीन जड़ी-बूटियाँ चाहिए होंगी जो इन तीनों पर काम करें।
इसके लिए पहली जड़ी-बूटी है अश्वगंधा, जिसे हम सदियों से जानते हैं। जब आपका कोर्टिसोल कम रहता है, तो वह टेस्टोस्टेरोन को कम कर देता है। अश्वगंधा कार्टिसोल को नीचे लाता है और जब कार्टिसोल नीचे आता है तो टैस्टोटीरोन अपने आप बढ़ने लगता है। यह सिर्फ आयुर्वेद ही नहीं कहता फ्रंटीयर्स जनरल में 2026 में प्रकाशित एक शोध भी इसकी पुष्टि करता है। यह बताता है कि अश्वगंधा लेने वालों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन पर लगाम लगती है और यौनेच्छा और टैस्टोटीरोन बढ़ते हैं।
दूसरी जड़ी-बूटी है कौंच बीज। ये काले रंग के बड़े बीज होते हैं। इनमें एक एल-डोपा नामक तत्व होता है जो आपके मस्तिष्क में जाकर डोपामिन बनाता है। डोपामिन वही तत्व है जो आपकी यौन इच्छा और उत्तेजना को बढ़ाता है। फर्टीलिटी और स्टरिलिटी नाम की एक रिसर्च में साबित हुुआ है कि कौंच बीज डोपामीन और टैस्टोटीरोन दोनों को बढ़ाता है। ये प्रोलैक्टिंग नाम के हॉर्मोन को कम करता है जो आपकी यौनेच्छा को घटाता है।
और तीसरी जड़ी-बूटी है बहुचर्चित शिलाजीत। इसे आयुर्वेद में महारस कहा गया है, यानी यह सुपर वाइटलिस्ट है। इसमें मौजूद फुलविक एसिड शरीर को ताकत देता है और टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाता है। लेकिन आपको एक बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि शिलाजीत का प्रभाव तभी होता है जब वो शुद्ध हो। बाजार में बिकने वाले अधिकतर शिलाजीत उत्पादों में हानिकारक हैवी मेटल्स जैसे लेड, आर्सेनिक और मर्करी पाए गए हैं। इसलिए आवश्यक है कि आप जो भी शिलाजीत लें वह पूरी तरह शुद्ध और प्रामाणिक हो।
अब आइए बताते हैं कि इन चीजों का उपयोग कैसे करना है। आप पांच ग्राम अश्वगंधा रात को सोते समय एक गिलास दूध के साथ ले सकते हैं। एक चम्मच कौंच बीज आप सुबह नाश्ते के बाद ले सकते हैं। और एक चने के दाने के बराबर शिलाजीत पानी या दूध में घोलकर लिया जा सकता है। एक बात अवश्य ध्यान में रखें कि इन जड़ीबूटियांे का आवश्यकता से अधिक सेवन शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।
हैल्थ हमेशा यूट्ब चैनल के डॉक्टर सलीम जैदी ने इस इन तीनों और कुछ अन्य जड़ीबूटियों को ं मिलाकर ‘एच2 वेदा वज्र कैप्सूल’ का निर्माण किया है। उनका दावा है कि इसमें सभी जड़ीबूटियां सही अनुपात में डाली गईं हैं और इसका निर्माण पूर्णतः स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में होता है। उनका दावा है कि ये कैप्सूल काफी प्रभावी है। वो कहते हैं कि ये कैप्सूल सुबह नाश्ते के बाद पानी या दूध के साथ लिया जा सकता है।
डॉक्टर सलीम जैदी कहते हैं कि ये कैप्सूल कोई जादू की छड़ी नहीं है जो तुरंत असर दिखाने लगे। ये शरीर और नसों को धीरे-धीरे ताकत देता है। इसे लगातार 90 दिन लेना होगा। तभी ये असर दिखाएगा।
अंत में जरूरी बात। मर्दाना ताकत में कमी मधुमेह या अन्य बीमारियों के कारण भी हो सकती है। यदि आपको इन बीमारियों के लक्षण दिखाई दें, तो पहले इनका इलाज अवश्य करवाएं।